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सोमवार, 5 जुलाई 2021

बुक सोचिए और अमीर बनिए (Think and Grow Rich) नेपोलियन हिल (Napoleon Hill) की पुस्तक की समीक्षा और सार हिंदी में

पुस्तक समीक्षा (Book Review) : Think and Grow Rich

हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)  : सोचिए और अमीर बनिए  (Sochiye Aur Amir Baniye)

लेखक (Writer) : नेपोलियन हिल (Napoleon Hill) 




लेखक के बारे में (About Author) :  नेपोलियन हिल (Napoleon Hill)  एक जनरलिस्ट, लेक्चर , लेखक और बिजनेस परामर्शदाता थे जिन्होंने बहुत सारे सफल लोगों से मिलकर सफलता के रास्ते खोज निकाले  जिनसे बहुत सारे लोगों को सफल होने में मदद मिली है।

 पुस्तक के बारे में (About Book) :  इस पुस्तक सोचिए और अमीर बनिए में हमें बहुत सारे ऐसे रास्ते बताए गए हैं जिन को फॉलो करके हम भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। जिनमें से 10 महत्वपूर्ण रास्तों के  बारे में यहां पर बताया गया है।

1. विचार ही वस्तु है :

 हमारे विचार ही हमारी सबसे महत्वपूर्ण वस्तु होती है। अमीरी और गरीबी हमारे विचारों के कारण ही आती है। हमारी तरक्की हमारे विचारों पर ही निर्भर करती है। अगर हमारे विचार  प्रबल होंगे तो हमारा मस्तिष्क ऐसी योजनाएं बनाने लग जाएगा जिनसे हम बहुत जल्दी हमारी सफलता की मंजिल तक पहुंच जाएंगे।

2. प्रबल इच्छा :

 सफलता 100% मिलती है लेकिन हमारी इच्छा प्रबल होनी जरूरी है। अगर हमारी इच्छा प्रबल होगी तो वह हमारे मन और मस्तिष्क पर हावी हो जाएगी तथा वह हमें हमारी सफलता की मंजिल तक ले जाएगी।

3. अवचेतन मस्तिष्क को प्रोग्राम करें :

 जितना भी पैसा  हमें चाहिए,  उसकी दिनांक हमें सोचनी होगी तथा उसे लिखना होगा , उसे बार-बार सोचना होगा, बार बार पढ़ना होगा, बार-बार दोहराना होगा जब तक कि वह अपने अवचेतन मन में चिपक ना जाए। ऐसा करने से हमारी मंजिल हमारी तरफ खींची चली आएगी।

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4. विशेषज्ञीय ज्ञान :

 हर वह आदमी शिक्षित है जिसे यह पता हो कि उसे ज्ञान कहां से मिलेगा और उस ज्ञान से निश्चित कार्य योजना बनाने का तरीका  पता हो। डिग्रियां होना शिक्षित आदमी की पहचान नहीं है। उस ज्ञान के द्वारा हमें हमारे उद्देश्य की पूर्ति करना भी आना जरूरी है। हम भी हमारी सफलता के लिए विशेषज्ञों के समूह  से सीख सकते हैं और हमारे लक्ष्य तक पहुंचने की एक सुव्यवस्थित कार्य योजना बनाकर वहां तक पहुंच सकते हैं।

5. कल्पना की वर्कशॉप :

 मनुष्य की कल्पना करने की ताकत किसी भी चीज की रचना कर सकती है। अगर हम हमारे विचारों के साथ हमारी कल्पना शक्ति को मिलाकर कार्य करते हैं तो बहुत बड़े परिणाम देखने को मिलते हैं। इसलिए हमें हमारी इमेजिन करने की शक्ति को बहुत अधिक बढ़ाना होगा।

6. सुव्यवस्थित योजना :

 हमारा निश्चित लक्ष्य और सुव्यवस्थित योजना हमारे विचारों को नगद में परिवर्तित करने की क्षमता रखते हैं। योजना ऐसी होनी चाहिए जिसको अमल में लाया जा सके। हमें तब तक योजनाएं बनाते रहना है जब तक की हमें ऐसी योजना ना मिल जाए जो हमें हमारी मंजिल तक पहुंचा दे।

7. लगन :

 ज्यादातर लोग पहली समस्या के साथ ही मैदान छोड़ देते हैं लेकिन सफल लोग बड़ी समस्याओं के बावजूद भी अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते रहते हैं। हमें भी तब तक नहीं रुकना है जब तक की हम हमारी मंजिल तक ना पहुंच जाएं। हम अगर समस्याओं से घबराकर रुकेंगे नहीं तो पक्का हमारी मंजिल को प्राप्त करेंगे।

8. लीडरशिप के गुण :

 हमारे अंदर लीडरशिप के गुण होना बहुत जरूरी है। इसके लिए हमें हमारे अंदर अविचलित साहस को बढ़ाना होगा। निर्णय शक्ति को बढ़ाना होगा। जिम्मेदारी लेना सीखना होगा। जिससे हम हमारी सफलता की मंजिल की तरफ कदम दर कदम बढ़ते जाएंगे।

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9. कमियों को दूर करें :

 हमें हमेशा यह जांच करते रहना चाहिए कि  हमें अभी कौन सी कमी को दूर करना है। जैसे अगर किसी काम को करने के लिए विशिष्ट शिक्षा की कमी है तो उसकी पूर्ति किसी सफल समूह के साथ  मिलकर  पूरी करना बहुत जरूरी है।

आत्म अनुशासन की कमी को दूर करना बहुत जरूरी है। समय, पैसा तथा व्यवहार को काम में लेना सीखना होगा।

टालमटोल  की आदत को ठीक करना होगा। किसी भी काम को करने के लिए आज का समय सबसे अच्छा है। अति सावधानी बरतना छोड़ना चाहिए और  सावधानी रखते हुए काम करते जाना चाहिए।

घमंड और अहंकार से कोसों दूर  रहना होगा। मुझे सब कुछ पता है वाला रवैया हमें कुछ भी सीखने नहीं देगा। हमें हमेशा सहयोग की भावना के साथ सीखते हुए आगे कदम बढ़ाते जाना है।

पुस्तको कि सारणी 

10. डर के छह भूतों को भगाएं :

 हमारे द्वारा समय पर निर्णय ना ले  पाने से डर का अंकुरण   पनपता है। अनिर्णय से शंका पैदा होती है।

 डर अनेक प्रकार के होते हैं :

   (i)  गरीबी का डर : हमें गरीबी के डर को हटाकर आगे बढ़ने की इच्छा और अमीरी की चाहत को बढ़ाना चाहिए।

   (ii)  आलोचना का डर : लोग क्या कहेंगे इसकी परवाह ना करके आगे बढ़ना होगा और सफल होकर दिखाना होगा।

   (iii)  बुरे स्वास्थ्य का डर : हम अगर ज्यादा मेहनत करेंगे तो हमारा स्वास्थ्य खराब हो जाएगा, इस डर से बाहर निकल कर हमें हमारी मंजिल के लिए मेहनत करनी होगी।

   (iv) बुढ़ापे का डर : हमें कभी भी बुढ़ापे से डरते हुए काम नहीं करना है। हर उम्र में लोग सफल हुए हैं। हम भी हमारी वर्तमान उम्र में सफल हो सकते हैं  और हमारी आने वाली जिंदगी को खूबसूरत बना सकते हैं।

   (v) प्रेम का डर : हमें हमारे परिवार और प्रिय जनों से बिछड़ने के डर से बाहर निकल कर लक्ष्य की तरफ बढ़ना चाहिए।

   (vi)  मौत का डर : जिसने जन्म लिया है उसे एक ना एक दिन जरूर जाना है इसलिए उसे बेवजह ना डर कर अपने जीवन में आगे बढ़ना होगा। हमें अपने , परिवार और लोगों के लिए कुछ ऐसे काम करने होंगे जिससे लोग हमें हमेशा के लिए याद रख पाए।

 इस तरह से इस बुक सोचिए और अमीर बनिए में दी गई सफलता की शिक्षाओं  के द्वारा हम हमारी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।


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